खगड़िया(प्रवीण कुमार प्रियांशु)।
जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लालदेव टोला, धोवघट्टा की एचएम निशी कुमारी की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा।आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि, एचएम के द्वारा छात्र-छात्राओं का निवाला तो गटक ही लिया जाता है,अन्य मामलों में उनकी मनमानी भी चरम पर है।एचएम के विरुद्ध कई गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि,एचएम की मनमानी से बच्चों की हकमारी हो रही है।इतना ही नहीं,छात्र-छात्राओं के पोशाक व छात्रवृति राशि के आवंटन एवं वितरण में भी एचएम द्वारा अनियमिता बरती गई है।मध्याह्न भोजन से लेकर अन्य योजनाओं की राशि के नाम पर जमकर लूट-खसोट की जा रही है।ग्रामीणों ने कहा कि,प्राथमिक विद्यालय लालदेव टोला,धोवघट्टा की प्रधानाध्यापिका निशी कुमारी की मनमानी इस कदर चरम पर है कि,विद्यालय में माध्याह्न भोजन महीनों से बंद पड़ा हुआ है।रसोई गैस के तौर पर सिलेंडर के बजाय चूल्हे पर भोजन तैयार किया जाता है।ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय न के बराबर ही खुलता है। अगर किसी दिन विद्यालय खुल भी जाता है,तो समय से पहले विद्यालय बंद भी हो जाता है।उक्त विद्यालय में चार शिक्षकों में 3 शिक्षिका हैं।बावजूद इसके पठन-पाठन भगवान भरोसे है।
आक्रोशित लोगों का यह भी कहना था कि,जब कोई ग्रामीण विद्यालय के मामले में जानकारी लेना चाहते हैं,तो उसके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए कहा जाता है कि, पदाधिकारी से लेकर सभी को महीना दिया जाता है।
इसलिए जहां शिकायत करना है,वहां करो।इधर,ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से एचएम को विद्यालय से हटाने की मांग करते हुए कहा है कि,पोशाक एवं छात्रवृत्ति के अलावे अन्य योजनाओं की जांच कराई जाए।अगर इस ओर जल्द से जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया,तो सभी ग्रामीण सड़क पर उतरकर प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध आदोलन का शखनाद करेंगे।दूसरी तरफ इस संबंध में प्रधानाध्यापिका से जानकारी लेने के लिए बार- बार उनके मोबाइल पर फोन किया गया।लेकिन घंटी बजती रही,कोई जबाव नहीं मिला।
बहरहाल,अब देखना दिलचस्प होगा कि,ऐसी दबंग प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई आखिर कब तक होती है!क्योंकि कई विद्यालय की शिकायत आने पर विभागीय पदाधिकरियों द्वारा जांच करने की बात तो कही जाती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाता है,वैसे-वैसे मामला ठंढ़े बस्ते में चला जाता है।
खगड़िया
एचएम की मनमानी से नाराज ग्रामीणों ने विद्यालय पहुंचकर जमकर काटा बवाल,बच्चों का निवाला गटक जाने सहित लगाया अन्य गंभीर आरोप
खगड़िया(प्रवीण कुमार प्रियांशु)। जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लालदेव टोला, धोवघट्टा की एचएम निशी कुमारी की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा।आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि, एचएम के द्वारा छात्र-छात्राओं का निवाला तो गटक ही लिया जाता है,अन्य मामलों में उनकी मनमानी भी चरम पर है।एचएम के विरुद्ध कई गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों


जिले के अलौली प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लालदेव टोला, धोवघट्टा की एचएम निशी कुमारी की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा।आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि, एचएम के द्वारा छात्र-छात्राओं का निवाला तो गटक ही लिया जाता है,अन्य मामलों में उनकी मनमानी भी चरम पर है।एचएम के विरुद्ध कई गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि,एचएम की मनमानी से बच्चों की हकमारी हो रही है।इतना ही नहीं,छात्र-छात्राओं के पोशाक व छात्रवृति राशि के आवंटन एवं वितरण में भी एचएम द्वारा अनियमिता बरती गई है।मध्याह्न भोजन से लेकर अन्य योजनाओं की राशि के नाम पर जमकर लूट-खसोट की जा रही है।ग्रामीणों ने कहा कि,प्राथमिक विद्यालय लालदेव टोला,धोवघट्टा की प्रधानाध्यापिका निशी कुमारी की मनमानी इस कदर चरम पर है कि,विद्यालय में माध्याह्न भोजन महीनों से बंद पड़ा हुआ है।रसोई गैस के तौर पर सिलेंडर के बजाय चूल्हे पर भोजन तैयार किया जाता है।ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय न के बराबर ही खुलता है। अगर किसी दिन विद्यालय खुल भी जाता है,तो समय से पहले विद्यालय बंद भी हो जाता है।उक्त विद्यालय में चार शिक्षकों में 3 शिक्षिका हैं।बावजूद इसके पठन-पाठन भगवान भरोसे है।
इसलिए जहां शिकायत करना है,वहां करो।इधर,ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से एचएम को विद्यालय से हटाने की मांग करते हुए कहा है कि,पोशाक एवं छात्रवृत्ति के अलावे अन्य योजनाओं की जांच कराई जाए।अगर इस ओर जल्द से जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया,तो सभी ग्रामीण सड़क पर उतरकर प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध आदोलन का शखनाद करेंगे।दूसरी तरफ इस संबंध में प्रधानाध्यापिका से जानकारी लेने के लिए बार- बार उनके मोबाइल पर फोन किया गया।लेकिन घंटी बजती रही,कोई जबाव नहीं मिला।
बहरहाल,अब देखना दिलचस्प होगा कि,ऐसी दबंग प्रधानाध्यापिका के विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई आखिर कब तक होती है!क्योंकि कई विद्यालय की शिकायत आने पर विभागीय पदाधिकरियों द्वारा जांच करने की बात तो कही जाती है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जाता है,वैसे-वैसे मामला ठंढ़े बस्ते में चला जाता है।
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