

एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
नगर परिषद खगड़िया में सशक्त स्थायी समिति और सामान्य बोर्ड की बैठकों के आयोजन को लेकर प्रशासनिक एवं संस्थागत प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। लगभग तीन महीने से दोनों महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन नहीं होने पर नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कार्यपालक पदाधिकारी सिंधु कमल से 24 घंटे के भीतर छह बिंदुओं पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर, कार्यपालक पदाधिकारी ने पिछली बैठक की कार्यवाही (प्रोसीडिंग) विधिवत समाप्त नहीं होने को नई बैठक आयोजित करने की प्रक्रिया में बाधा बताया है।
इस प्रकरण में दोनों पक्षों के अलग-अलग तर्क सामने आए हैं। सभापति जहां बैठक आयोजित नहीं होने और कार्यालय में आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं किए जाने पर सवाल उठा रही हैं, वहीं कार्यपालक पदाधिकारी का कहना है कि पिछली बैठक की कार्यवाही पूरी किए बिना नई बैठक के लिए पत्र जारी करना बिहार नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में विवाद का केंद्र अब बैठकों के आयोजन के साथ-साथ उनकी कार्यवाही पूरी करने की प्रक्रिया और संबंधित जिम्मेदारियों पर भी आ गया है।
तीन महीने से लंबित बैठकें, निर्णय प्रक्रिया पर सवाल
नगर परिषद की सशक्त स्थायी समिति और सामान्य बोर्ड की बैठकें शहरी प्रशासन की निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से विकास योजनाओं, नागरिक सुविधाओं, जनसमस्याओं, बजटीय प्रस्तावों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाता है।
नगर सभापति का कहना है कि लगभग तीन महीने से इन बैठकों का आयोजन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उनका तर्क है कि छठ और दीपावली जैसे प्रमुख पर्वों के मद्देनजर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जलनिकासी, पेयजल और छठ घाटों की तैयारियों की समय रहते समीक्षा आवश्यक थी।
तीन नवंबर को जारी किए गए बैठक संबंधी पत्र
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नगर सभापति कार्यालय की ओर से तीन नवंबर 2026 को दो पत्र जारी किए गए थे। पत्रांक 133A/NPK के माध्यम से सशक्त स्थायी समिति की बैठक के लिए एजेंडा भेजा गया था। वहीं, पत्रांक 134A/NPK के जरिए सामान्य बोर्ड की बैठक 10 नवंबर 2026 को अपराह्न दो बजे आयोजित करने के संबंध में पत्र जारी किया गया था।
सभापति का आरोप है कि इन पत्रों के जारी होने के बावजूद बैठक आयोजित करने की दिशा में अपेक्षित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई। इसी संदर्भ में उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है।
कार्यालय में पत्र प्राप्ति को लेकर भी उठे सवाल
सभापति की ओर से जारी स्पष्टीकरण पत्र में कहा गया है कि दोनों पत्र कार्यालय में जमा कराने के लिए लगातार चार दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें प्राप्त नहीं किया गया।
सभापति ने आरोप लगाया है कि कार्यालय कर्मियों ने मौखिक रूप से बताया कि कार्यपालक पदाधिकारी के निर्देश पर सभापति कार्यालय से आने वाले पत्र स्वीकार नहीं किए जाने हैं। हालांकि, इस कथित निर्देश की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।
सभापति के अनुसार, कार्यालय में पत्र जमा नहीं हो पाने के बाद दोनों पत्र कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यालय के मुख्य द्वार पर चस्पा करने पड़े। इस घटनाक्रम ने नगर परिषद के भीतर आधिकारिक पत्राचार और प्रशासनिक समन्वय की व्यवस्था को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं।
छह बिंदुओं पर मांगा गया लिखित स्पष्टीकरण
नगर सभापति अर्चना कुमारी ने कार्यपालक पदाधिकारी से छह बिंदुओं पर तथ्यात्मक जवाब मांगा है। इनमें लगभग तीन महीने से बैठक आयोजित नहीं होने का कारण, तीन नवंबर को जारी पत्रों पर कार्रवाई की स्थिति, सामान्य बोर्ड की बैठक से संबंधित सूचना जारी नहीं किए जाने की वजह, कार्यालय कर्मियों द्वारा पत्र प्राप्त करने से कथित इनकार तथा मुख्य द्वार पर पत्र चस्पा करने की परिस्थिति से जुड़े प्रश्न शामिल हैं।
सभापति ने 24 घंटे के भीतर लिखित जवाब देने की मांग की है। साथ ही, संतोषजनक स्पष्टीकरण और आवश्यक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में सक्षम उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत कराने तथा नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा करने की बात कही है।
कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष: पिछली बैठक की प्रोसीडिंग पूरी करना आवश्यक



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