एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया


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नगर परिषद खगड़िया क्षेत्र में कचहरी रोड एवं सोनमंखी-गौशाला रोड में BUIDCO द्वारा कराए जा रहे नाला निर्माण में कथित लापरवाही को लेकर नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा की शिकायत और लगातार सक्रियता के बाद शुक्रवार को प्रशासनिक स्तर पर जांच की गई। SDM धनंजय कुमार की अध्यक्षता में पुल निगम के कार्यपालक अभियंता, RCD के कार्यपालक अभियंता एवं नगर परिषद खगड़िया की कार्यपालक पदाधिकारी सिन्धु कमल की मौजूदगी में निर्माणाधीन दोनों नालों का स्थल निरीक्षण किया गया।ज्योतिष मिश्रा द्वारा उठाए गए तकनीकी सवालों के बाद हुई इस जांच में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर बिंदु सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों ने मौके पर नाले की निर्माण स्थिति, लेवल, एलाइनमेंट, कंक्रीट एवं क्यूरिंग समेत विभिन्न पहलुओं का निरीक्षण किया।14 दिन की क्यूरिंग के बजाय 1–2 दिन में ही क्यूरिंग का आरोप जांच के दौरान नाले की क्यूरिंग प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए। ज्योतिष मिश्रा के अनुसार, जहां निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अवधि तक क्यूरिंग किया जाना आवश्यक है, वहां कई स्थानों पर 14 दिन की क्यूरिंग के बजाय मात्र एक से दो दिन तक ही क्यूरिंग किए जाने की स्थिति जांच में सामने आई।यदि यह स्थिति तकनीकी जांच में प्रमाणित होती है तो इससे कंक्रीट की मजबूती और नाले की दीर्घकालिक गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इसी कारण अधिकारियों ने पूरे निर्माण की गुणवत्ता की विस्तृत जांच करने की आवश्यकता जताई। वाइब्रेटर का इस्तेमाल नहीं होने से हनीकॉम्बिंग की स्थिति निरीक्षण के दौरान कंक्रीट में वाइब्रेशन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। ज्योतिष मिश्रा का आरोप है कि निर्माण के दौरान कई स्थानों पर वाइब्रेटर का समुचित इस्तेमाल नहीं किया गया, जिसके कारण नाले के विभिन्न हिस्सों में हनीकॉम्बिंग/छेद जैसी स्थिति दिखाई दी।उन्होंने कहा कि नाले का निर्माण लंबे समय के लिए किया जा रहा है और इसमें किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए केवल ऊपर से मरम्मत करने के बजाय निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता की तकनीकी जांच जरूरी है।पूरे नाले के एलाइनमेंट पर भी उठे सवाल जांच के दौरान नाले के एलाइनमेंट को लेकर भी गंभीर आपत्ति सामने आई। ज्योतिष मिश्रा के अनुसार, कई स्थानों पर नाला सीधी लाइन में नहीं है और उसका एलाइनमेंट असामान्य दिखाई देता है। उन्होंने पहले भी सवाल उठाया था कि कहीं नाला जमीन के नीचे है तो कहीं सड़क के स्तर से काफी ऊपर बनाया जा रहा है।अधिकारियों द्वारा मौके पर स्थिति देखने के बाद अब दोनों नालों के लेवल और गुणवत्ता की दोबारा विस्तृत जांच किए जाने की बात सामने आई है।कल फिर होगी लेवल और क्वालिटी की जांच प्रशासनिक जांच के बाद निर्णय लिया गया है कि दोनों निर्माणाधीन नालों की लेवल एवं क्वालिटी की दोबारा जांच की जाएगी। इसमें नाले की ऊंचाई, गहराई, ढलान, एलाइनमेंट, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया समेत तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी।इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।BUIDCO के अभियंताओं और संवेदक की भूमिका पर ज्योतिष मिश्रा ने उठाए सवाल पूरे मामले को लेकर ज्योतिष मिश्रा ने BUIDCO के कनीय अभियंता और सहायक अभियंता की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित अभियंताओं और संवेदक के बीच मिलीभगत के कारण निर्माण कार्य में इस प्रकार की लापरवाही हुई है।हालांकि, यह आरोप ज्योतिष मिश्रा द्वारा लगाए गए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में तकनीकी अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित अभियंताओं एवं संवेदक की जिम्मेदारी तय की जाए|“सरकारी राशि से बनने वाला नाला मजबूत और टिकाऊ होना चाहिए”ज्योतिष मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य विकास कार्य को रोकना नहीं, बल्कि सरकारी राशि से बनने वाले नाले की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण के समय ही तकनीकी खामियां पकड़ में आ जाएं तो उन्हें सुधारना आसान है, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद समस्या सामने आने पर दोबारा सरकारी राशि खर्च करनी पड़ सकती है।उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा तत्काल संज्ञान लेकर जांच कराने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि अब लेवल और गुणवत्ता की दोबारा होने वाली जांच से स्थिति और स्पष्ट होगी। उनका कहना है कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।