संवाददाता,खगड़िया।

उच्चतम न्यायालय के निर्देश को अगर पहले ही माना गया होता,तो न ही निकाय चुनाव स्थगित होता और न ही आज नीतीश सरकार को फजीहत का सामना करना पड़ता।बिहार में उच्चतम न्यायालय के निर्देश की अनदेखी कर नीतीश सरकार नगर निकाय चुनाव कराना चाहती थी,लेकिन अंतत:नीतीश कुमार को कोर्ट में समर्पण करना पड़ा।उक्त बातें भाजपा चुनाव सेल के खगड़िया जिला संयोजक प्रोफेसर डॉ अरविंद कुमार सिंह ने एक बयान जारी कर कही।

उन्होंने कहा कि,बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने सही ही कहा है कि,नीतीश कुमार न केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना कर रहे थे,बल्कि बिहार में अतिपिछड़ों को आरक्षण दिए बिना ही चुनाव कराने की सोच पाल रखे थे।अंत में नीतीश कुमार की यह स्थिति हुई कि,हाई कोर्ट में उन्हें मुंह की खानी तो पड़ी ही,आत्म समर्पण कर कोर्ट की बात भी माननी पड़ी।श्री सिंह ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी की बातों को दुहराते हुए कहा कि, नीतीश सरकार ने अगर पहले ही विशेष आयोग बनाने का निर्णय ले लिया होता,तो शायद प्रत्याशियों को मेहनत और पैसा पानी में नहीं गंवाना पड़ता।प्रोफेसर सिंह ने कहा कि,राज्यसभा सांसद सुशील मोदी जी बार-बार कह रहे थे।लेकिन अहंकारी सीएम नहीं माने।कोर्ट ने उनके अहंकार को तोड़ दिया।उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव पर रोक लगने का हवाला देकर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी नीतीश कुमार से बार-बार कह रहे थे कि,निकाय चुनाव में अतिपिछड़ों को आरक्षण देने के लिए विशेष आयोग बनाया जाए।लेकिन वह नहीं माने और भाजपा को आरक्षण विरोधी बताने लगे।

प्रोफेसर अरविंद कुमार सिंह के मुताबिक नीतीश कुमार की हठधर्मिता के कारण अति पिछड़ों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।अब सवाल यह उठता है कि, प्रत्याशियों को हुए नुकसान की भरपाई आखिर कौन करेगा!प्रोफेसर सिंह ने पूर्व उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील मोदी की बातों को रेखांकित करते हुए कहा कि,हाई कोर्ट में न केवल सरकार को झुकना पड़ा, बल्कि आयोग बनाकर आरक्षण देने सहित दिसम्बर के पहले निकाय चुनाव कराने के नाम पर हामी भरनी पड़ी।