राजेश सिन्हा।

बिहार में प्रथम एवं द्वितीय चरण के नगर निकाय चुनाव को लेकर अभी पूरी तरह से समां बंधी भी नहीं थी कि,माननीय पटना उच्च न्यायालय के आदेश ने चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे चुनावी पहलवान के मंसूबे पर पानी फेर दिया।पटना उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश के आलोक में राज्य निर्वाचन आयोग,बिहार के सचिव ने सभी जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका)के नाम एक अत्यावश्यक पत्र जारी कर स्पष्ट कहा है कि,समादेश याचिका संख्या (12517/2022सुनील कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य)में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक04.10.2022को पारित आदेश के आलोक में नगरपालिका आम निर्वाचन 2022 की प्रक्रिया/तैयारी में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता होने के फलस्वरुप आगामी 10और 20अक्टूबर को होने वाले मतदान को स्थगित किया जाता है।स्थगित निर्वाचन मतदान की अगली तिथि पुन:कालक्रम में संसूचित किया जाएगा।

इसके पूर्व आज दुर्गा पूजा के नवमी के दिन बिहार में चल रहे नगर निकाय चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट का इस बड़ा फैसला आया।पटना हाईकोर्ट ने राज्य में चल रहे निकाय चुनाव पर रोक लगाते हुए कहा कि,बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछड़ों के नाम पर आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया था।हाईकोर्ट ने इसको लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी राज्य निर्वाचन आयोग पर जतायी थी।मालूम हो कि राज्य निर्वाचन आयोग ही नगर निकाय चुनाव करा रहा है।

 

हाईकोर्ट ने कहा कि,बिहार का राज्य निर्वाचन आयोग अपने संवैधानिक जिम्मेवारी का पालन करने में विफल रहा।जिसके कारण नगर निकाय चुनाव पर रोक लगी है।

बता दें कि पटना हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण को लेकर दायर याचिका पर 29 सितंबर को सुनवाई पूरी कर ली थी।सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को इस मामले में जल्द सुनवाई कर फैसला सुनाने को कहा था।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में आज पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और एस. कुमार की बेंच ने अपना फैसला दे दिया।हाईकोर्ट की बेंच ने कहा है कि,स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही जो आदेश दिया था,उसका बिहार में पालन नहीं किया गया।अति पिछड़ों के आरक्षण पर तत्काल रोक लगा दी गई है।

हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में अति पिछड़ों के आऱक्षण पर तत्काल रोक दिया।कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से कहा है कि,वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछड़ों के आरक्षण के लिए तय ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं की।बता दें कि,स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण दिये जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में फैसला सुनाया था कि, स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा निर्धारित तीन जांच की अर्हता पूरी नहीं कर लेती है।सुप्रीम कोर्ट ने जो ट्रिपल टेस्ट का फार्मूला बताया था,उसमें उस राज्य में ओबीसी के पिछड़ापन पर आंकड़े जुटाने के लिए एक विशेष आयोग गठित करने और आयोग की सिफारिशों के मद्देनजर प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण का अनुपात तय करने को कहा था। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि एससी,एसटी,ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा कुल सीटों का 50% की सीमा से ज्यादा नहीं हो।अंततः इस प्रकार से फिलहाल अति पिछड़े सीट सामान्य माने जायेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि, जब तक बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर लेती है,तब तक अति पिछडों के लिए आरक्षित सीट सामान्य माने जायेंगे।राज्य निर्वाचन आयोग अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य घोषित कर चुनावी प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकता है।लेकिन अति पिछ़ड़ों को आरक्षण देने से पहले हर हाल मे ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

हाईकोर्ट ने कहा कि,राज्य निर्वाचन आयोग या तो अति पिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य करार देकर चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाये या फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ट्रिपल टेस्ट करा कर नये सिरे से आरक्षण का प्रावधान करे।होईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के रवैये पर गहरी नाराजगी जतायी और कहा कि, राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी संवैधानिक जिम्मेवारी पूरी नहीं की।निर्वाचन आयोग हर बात के लिए राज्य सरकार पर निर्भर रहा।हाईकोर्ट ने पिछली तारीख पर ही कहा था कि, निर्वाचन आयोग चुनाव के डेट को आगे बढ़ा सकता है, लेकिन आयोग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।बहरहाल,अब सबकी निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा नगर निकाय चुनाव को लेकर फिर जारी की जाने वाली तिथि पर टिकी है।