संवाददाता

 

हाजीपुर।बेटी का शव गोद में लेकर बेबस पिता एम्बुलेंस के लिए अस्पताल का चक्कर काटता रहा,लेकिन एम्बुलेंस नहीं मिली।अस्पताल प्रबंधक द्वारा एम्बुलेंस देने से यह कहकर इंकार कर दिया गया कि,अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं है।बेबस पिता और परिजनों को काफी देर तक चक्कर काटने के बाद अस्पताल परिसर से बाहर जाकर एम्बुलेंस करना पड़ा।फिर परिजन शव को लेकर घर की ओर ले जा सके।हाजीपुर का यह नजारा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग कह रहे हैं कि,बिहार के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था कभी भी सुधरने वाली नहीं है।एक तरफ सीएम नीतीश कुमार स्वास्थ्य व्यवस्था में चार चांद लगाने का दावा करते हैं और डिप्टी सीएम अस्पताल का औचक निरीक्षण करते हैं,तो दूसरी तरफ अस्पतालों की कुव्यवस्था लोगों को बिलखने के लिए मजबूर करती है।हालांकि सिविल सर्जन अमरेन्द्र कुमार शाही इस संदर्भ में पूछे जाते ही भड़क गए और कहना शुरु कर दिया कि,वह यहां बैठे रहते हैं।लेकिन उनके पास कोई आता ही नहीं है,तो फिर उनको यह पता कैसे चलेगा कि,किसे एम्बुलेंस की जरुरत है और किसे नहीं!उन्हें नहीं पता कि, कौन अपनी बच्ची के शव को गोद में लेकर एम्बुलेंस के लिए अस्पताल का चक्कर काटता रहा।

बताया जा रहा कि जिले के राजापाकर थाना अंतर्गत बहुआरा गांव के अभिषेक सिंह की आठ साल की बेटी को घर में टीवी देखने के दौरान सांप ने डंस लिया।इलाज के लिए परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे,लेकिन डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।मृत घोषित करने के बाद परिजनों ने जब एम्बुलेंस देने को कहा,तब हाथ खड़ा कर दिया गया। बेबस पिता अपनी मासूम बेटी के शव को गोद में लेकर पूरे अस्पताल का चक्कर काटता रहा।निराश होकर कैंपस से बाहर आकर एम्बुलेंस के जरिए शव को घर ले गए।बहरहाल,एक बेबस पिता के लिए सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस की उपलब्धता आखिर क्यों नहीं हो सकी!यह जांच का विषय तो जरुर है।।