श्रवण आकाश/खगड़िया
जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत लगार पंचायत के चकरका गांव में मंगलवार सुबह झाड़ियों में पड़े एक नवजात शिशु को देखकर सनसनी मच गई।लावारिस हालत में पड़े नवजात शिशु को देखकर गांव के रंजीत मंडल ने उसे उठाकर सीएचसी परबत्ता पहुंचाया।यह जानकारी जंगल में आग की तरह फैल गयी और धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ सीएचसी में उमड़ने लगी।नवजात का इलाज कर रहे डॉक्टर कुमार आशुतोष ने कहा कि,झाड़ियों में पड़े मिले नवजात शिशु को अस्पताल लाया गया था,लेकिन उसका वजन कम रहने तथा बेहतर इलाज के लिए उसे खगड़िया सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है।सीएचसी से उक्त बच्चे को जैसे-तैसे रेफर करने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और लोग कहने लगे लगे कि नौ माह तक बच्चे को कोख में पालने वाली मां तो निर्दयी निकली,जो उसे दुनिया देखने से पहले झाड़ियों में फेंक आयी।दूसरी तरफ दयावान बने इंसान द्वारा जब उसे सीएचसी लाया गया तो डॉक्टर ने भी उस पर तरस खाए बिना जैसै-तैसे यहां से आनन-फानन में रेफर कर दिया।और अगर सीएचसी से रेफर किया ही गया,तो सीएचसी प्रबंधन द्वारा अपने कर्मियों के साथ उस नवजात को आखिर क्यों नहीं भेजा गया!
इतना ही नहीं,स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई।सीएचसी प्रबंधन से इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हुई!उसमें भी तब,जब उक्त नवजात शिशु को मातृत्व की छाया देने वाली कई मां और पिता खड़े रहे।कहा तो यह भी जा रहा है कि दर्जनों व्यक्ति उसे गोद लेने के लिए मंगलवार को दिनभर सीएचसी परबत्ता से लेकर सदर अस्पताल खगड़िया तक दौड़ लगाते रहे।किंतु उक्त बच्चे का इलाज कहां चल रहा है,इस पर अभी भी संशय बना हुआ है।
इधर,सिविल कोर्ट खगड़िया के एक अधिवक्ता ने कहा कि झाड़ी में जिंदा पाए गए उस बच्चे के साथ अगर कुछ होता है तो इसके लिए जवाबदेह होगा कौन?इस बाबत सीएचसी प्रभारी डॉक्टर कशिश ने कहा कि इसको लेकर उनके द्वारा बीएचएम को निर्देश दिया गया है और प्रशासनिक अधिकारियों को भी सूचना दी जा रही है।हालांकि गोगरी एसडीओ अमन कुमार सुमन ने कहा कि जब सीएचसी में नवजात शिशु को जीवित लाया गया था तो इस संदर्भ में बाल संरक्षण विभाग को सूचना देना था।सीएचसी प्रबंधन ने सूचना क्यों नहीं दिया,इसलोग लेकर वह अधीनस्थों को जांच का निर्देश देंगे।दोषी पाए जाने पर सीएससी प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा भी की जाएगी।बहरहाल,यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी अभागिन मां को जमकर कोस रहे हैं।
खगड़िया
आखिर किस निर्दयी मां ने नवजात शिशु को जन्म के कुछ देर बाद ही कर दिया झाड़ियों के हवाले!दयावान बने इंसान द्वारा झाड़ी से उठाकर परबत्ता सीएचसी लाए गए नवजात शिशु का आखिर कहां चल रहा ह
श्रवण आकाश/खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत लगार पंचायत के चकरका गांव में मंगलवार सुबह झाड़ियों में पड़े एक नवजात शिशु को देखकर सनसनी मच गई।लावारिस हालत में पड़े नवजात शिशु को देखकर गांव के रंजीत मंडल ने उसे उठाकर सीएचसी परबत्ता पहुंचाया।यह जानकारी जंगल में आग की तरह फैल गयी और धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ सीएचसी में उमड़ने लगी।नवजात का इलाज कर रहे डॉक्ट


जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत लगार पंचायत के चकरका गांव में मंगलवार सुबह झाड़ियों में पड़े एक नवजात शिशु को देखकर सनसनी मच गई।लावारिस हालत में पड़े नवजात शिशु को देखकर गांव के रंजीत मंडल ने उसे उठाकर सीएचसी परबत्ता पहुंचाया।यह जानकारी जंगल में आग की तरह फैल गयी और धीरे-धीरे ग्रामीणों की भीड़ सीएचसी में उमड़ने लगी।नवजात का इलाज कर रहे डॉक्टर कुमार आशुतोष ने कहा कि,झाड़ियों में पड़े मिले नवजात शिशु को अस्पताल लाया गया था,लेकिन उसका वजन कम रहने तथा बेहतर इलाज के लिए उसे खगड़िया सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है।सीएचसी से उक्त बच्चे को जैसे-तैसे रेफर करने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया और लोग कहने लगे लगे कि नौ माह तक बच्चे को कोख में पालने वाली मां तो निर्दयी निकली,जो उसे दुनिया देखने से पहले झाड़ियों में फेंक आयी।दूसरी तरफ दयावान बने इंसान द्वारा जब उसे सीएचसी लाया गया तो डॉक्टर ने भी उस पर तरस खाए बिना जैसै-तैसे यहां से आनन-फानन में रेफर कर दिया।और अगर सीएचसी से रेफर किया ही गया,तो सीएचसी प्रबंधन द्वारा अपने कर्मियों के साथ उस नवजात को आखिर क्यों नहीं भेजा गया!
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