खगड़िया
लालच-लोभ व प्रभाव के मोहजाल में नहीं फंस सके अमितेश कुमार,तो दबंग विधायक डॉक्टर संजीब ने एसपी को ही जान का दुश्मन बता डाला,सरकार को भी हिलाने डूलाने की करने लगे कोशिश
राजेश सिन्हा की रिपोर्ट लालच-लोभ व प्रभाव के मोहजाल में नहीं फंस सके अमितेश कुमार,तो परबत्ता विस के दबंग विधायक डॉक्टर संजीब ने पुलिस कप्तान अमितेश कुमार को ही जान का दुश्मन बता डाला।यहां तक कि जब दबंग पूर्व विधायक पुत्र(वर्तमान परबत्ता विधायक)संजीब कुमार अपने शातिर दिमागी बल पर सरकार को बेवजह बहुत कुछ दिखा नहीं सके,तो नीतीश सरकार को ही गिराने की कोशिश में भ


लालच-लोभ व प्रभाव के मोहजाल में नहीं फंस सके अमितेश कुमार,तो परबत्ता विस के दबंग विधायक डॉक्टर संजीब ने पुलिस कप्तान अमितेश कुमार को ही जान का दुश्मन बता डाला।यहां तक कि जब दबंग पूर्व विधायक पुत्र(वर्तमान परबत्ता विधायक)संजीब कुमार अपने शातिर दिमागी बल पर सरकार को बेवजह बहुत कुछ दिखा नहीं सके,तो नीतीश सरकार को ही गिराने की कोशिश में भी लग गए।यह सुनने या पढ़ने में भले ही लोगों को अटपटा लगे,लेकिन जमीनी हकीकत यही है।पुलिस के आलाधिकारी पूरे प्रकरण को खंगालने में कहां तक पहुंचे,यह तो मुझे नहीं पता।लेकिन जैसे-जैसे मैं परत दर परत खंगालता गया,तो यह बात साक्ष्य सहित मेरे सामने आया कि,अगर पूर्व के कुछ अन्य पुलिस कप्तान भी परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से जारी 'अग्रेजी हुकूमत' की खिलाफत करते तो शायद उन पर यही तोहमत लगती,कि एसपी ही हैं जान के दुश्मन। दरअसल, कभी बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे बिहार सरकार के पूर्व परिवहन मंत्री आरएन सिंह परबत्ता विस में यही करते आए हैं और होता भी यही आया था कि वह जब जो चाहते थे,वही होता था।परबत्ता के वर्तमान विधायक डॉक्टर संजीब भले ही पहली बार विधायक बने हों,लेकिन पूर्व विधायक आरएन सिंह का पुत्र होने के नाते वर्षों से यही करते रहे।मेरे पास उपलब्ध तमाम साक्ष्यों का कंठ दबा भी दिया जाय, तो भी यह कहने में कहीं संकोच नहीं है कि परबत्ता विस के कई निर्दोष लोगों को भी जेल की सलाखों के पीछे महज इसलिए जाना पड़ा,क्योंकि उन्होंने पूर्व विधायक आरएन सिंह को या तो पैर छूकर प्रणाम नहीं किया अथवा परबत्ता के राजा कहे जाने डॉक्टर संजीब की बातों को मानने से इंकार कर दिया।यहां तक कि कई महादोषी भी आज की तिथि में निर्दोष बने फिर रहे हैं। हालांकि यह भी कहने से मैं गुरेज नहीं करुंगा कि खगड़िया के पुलिस कप्तान अमितेश कुमार ने अपने मातहतों पर इतना भरोसा कर रखा है कि असामाजिक तत्वों का सभी थाने में जमावड़ा लगता है।थानेदार छाली काट रहे हैं और एसपी को बदनामी की चादर ओढ़नी पड़ रही है।बहरहाल,चलते-चलते मैं यह स्पष्ट कह दूं,कि बस मैंने कुछ हकीकत लिख दिया। यह बताने के लिए कि इतना साक्ष्य,प्रमाण और बहुत कुछ है,जिससे अंग्रेजी शासन चलाने वाले ऐसे सफेदपोशों को बेनकाब तो कर कर रहूंगा।लेकिन पूरी खबर इकट्ठा करने के दौरान मैं नींद से नहीं सो सका।इस प्रसंग को ले अभी बहुत बड़ी-बड़ी खबर बांकी है। क्रमश:
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