राजेश सिन्हा की कलम से

खगड़िया एसपी अमितेश कुमार को बदल दीजिए, अन्यथा हो जाएगी मेरी हत्या!यह कहकर राजा घराने के दबंग परबत्ता विधायक डॉक्टर संजीब अब बुरी तरह फंस चुके हैं।कानूनी तौर पर उनके विरुद्ध क्या और कैसी सजा होगी!यह तो शासन-प्रशासन ही जाने,लेकिन एसडीएफ लाइव इंडिया द्वारा दबंग कहे जाने पूर्व परिवहन मंत्री रामानंद सिंह के बिगड़ैल पुत्र का कारनामा मैं तब तक जनता के सामने लाता रहूंगा,जब तक परबत्ता के दबंग विधायक डॉक्टर संजीब का पूरा कारनामा शासक-प्रशासक तक न पहुंचा दूं।बात अलग है कि अब तक कई गरीब व मजलूम लोगों पर सितम ढ़ाने वाले परबत्ता के पूर्व विधायक सह पूर्व परिवहन मंत्री रामानंद सिंह(आरएन सिंह) के पुत्र वर्तमान विधायक डॉक्टर संजीब पर कार्रवाई करना सरकार के लिए भी आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी कि,अपने आपको डॉक्टर कहने वाले विधायक संजीब ने अपने पिता आरएन सिंह के ही कार्यकाल से गरीब व जरुरतमंदों का इतना खून चूंसा है कि,उसकी लिस्ट लंबी होती जा रही है।लोगों की कृपा से राजनीतिक अंदाज में ही सही, 'टीस' मुझ तक पहुंच गई है। बाप-बेटों ने बेवस लोगों पर महज इसलिए कहर ढ़ाया,क्योंकि भगवान का चरण छूने वालों ने इन दबंग पिता-पुत्र का चरण स्पर्श नहीं किया या पिता-पुत्र के आदेश का पालन नहीं किया।बावजूद इसके पुलिस महकमा चुप रहा। बात अगर सच में कहूं तो,मीडिया के सामने चीटीं तक नहीं मारने की बात करने वाले परबत्ता के विधायक डॉक्टर संजीब ने अपने पावर के दम पर परबत्ता विस के लगभग दो हजार से अधिक लोगों को सितम का शिकार बनाया है।यहां तक कि विधायक डॉक्टर संजीब के विरुद्ध भी आठ मामले दर्ज हैं।पूर्व परिवहन मंत्री रामानंद सिंह सहित उनके दबंग पुत्र डॉक्टर संजीब के द्वारा सताए गए पुलिस पदाधिकारियों ने भी स्वीकारा कि,मैंने आरएन सिंह का पांव नहीं छूआ,तो डॉक्टर संजीब ने गालियों की बौछार कर दी।कुछ पुलिस पदाधिकारियों ने तो,यहां तक कह दी,कि बाप-बेटों के फेर में मैंने इंसाफ की पटकथा लिखी ही नहीं। हालांकि यह मैं नहीं कह रहा,तमाम साक्ष्य चीख-चीख कर कह रहा है। कहते-कहते फिर कह दूं,कि तरकश में बहुत तीर है,लेकिन अभी बड़ी खबर के तौर पर बस यही लाया हूं। फिर कल करुंगा बात।।