*प्रवीण कुमार प्रियांशु

 

अलौली(खगड़िया)।कोरोना महामारी की बढ़ती दूसरी लहर ने लोगों की जिंदगी रेखा बदलकर रख दी है।सरकार के द्वारा कोरोना के कहर पर काबू पाने के लिए तमाम प्रयास किए जाने के बाद भी संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कोरोना के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य सरकार के द्वारा कई बंदिशें लगाई गई है।खगड़िया के जिलाधिकारी डॉक्टर आलोक रंजन घोष की सक्रियता के कारण जिला मुख्यालय के विभिन्न इलाकों में सरकारी गाइड लाइंस का पालन तो काफी हद तक हो रहा है,लेकिन ग्रामीण इलाकों में सरकारी गाइड लाइंस की धज्जियां उड़ती नजर आ रही है।बावजूद इसके बीडीओ, सीओ और थाना पुलिस द्वारा कोई खास दिलचस्पी नहीं लिए जाने का नजारा भी सरेआम दिख रहा है। *************************************************** बात अगर अलौली प्रखंड अंतर्गत शुम्भा पंचायत की करें,तो यहां लॉक डाउन का कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।

   

हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पंचायत में मिठाई,मनिहारी,कपड़े सहित अन्य दुकानों का संचालन आम दिनों की तरह किया जा रहा है।ऐसी बात नहीं है,कि इस तरह का मामला स्थानीय थाना पुलिस तक नहीं पहुंच रहा है।पहुंच भी रहा है और बहादुरपुर पिकेट प्रभारी द्वारा बार-बार मौखिक तौर पर चेतावनी भी दी जा रही है।लेकिन लोगों के बीच कोरोना का डर नहीं के बराबर दिख रहा है।सरकारी गाइड लाइंस के मुताबिक सुबह 7 बजे से 11 बजे तक किराना दुकान,मांस-मछली एवं खाने-पीने के अलावा अन्य जरुरत के सामानों की दुकानें खुली रहनी है।उसके बावजूद भी शुम्भा पंचायत के सरस्वती स्थान चौक से लेकर दुर्गा स्थान गाजी घाट चौक तक खुलेआम सभी दुकानें दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक खुली रहती है।जानकारों की बातों पर अगर भरोसा करें,तो इस दौरान न ही सामाजिक दूरी का ख्याल रखा जा है और न ही मास्क का प्रयोग करना लोग मुनासिब समझ रहे हैं।जबकि इस पंचायत में अभी तक कोरोना के कारण 3-4 व्यक्तियों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग कोरोना संक्रमित हैं।फिर भी लोगों के बीच मौत का डर नहीं देखा जा रहा है और खुलेआम मौत को आमंत्रण दिया जा रहा है।बात अलग है कि पुलिस की गाड़ी आते ही दुकान संचालक दुकानों के अंदर छिप जाते हैं और जाते ही बाहर निकल आते हैं।

कहा जा सकता है कि लोगों की आदतों में यह शुमार हो गया है।बेवजह घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत के बाद भी खरीददार और दुकानदारों द्वारा सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है।स्थानीय जागरुक लोग बताते हैं कि सारा दिन दुकानदार पास ही बैठे रहते हैं और ग्राहकों के आते ही दुकान खोलकर समान देते नजर आते हैं।

स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि इस तरह की स्थिति के संदर्भ में अंचलाधिकारी के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को प्रबुद्ध ग्रामीणों के द्वारा तत्क्षण ही सूचना दी जाती है,लेकिन दिलचस्पी नहीं ली जाती है। *********************** *********************** ******