* राजेश सिन्हा खगड़िया जिले के नगर थाना पुलिस की गैर जवाबदेह रवैये के कारण नीमा कुमारी असमय दुनिया से रुखसत हो गई।नीमा की लिखित शिकायत पर पुलिस थोड़ी भी हरकत में आती,तो शायद वह अभी जिंदा रहती। नीमा के अधिवक्ता पिता रानीसकरपुरा निवासी अरुण कुमार सिंह व भाई प्रसिद्व सिंह ने पुलिस के विरुद्ध इस तरह का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दलालों की बातों पर पुलिस शिथिल हो गयी और उनकी बेटी की हत्या हो गयी।

अरुण सिंह का कहना है कि बीते शुक्रवार को 10:42 मिनट पर उन्होंने नगर थाना प्रभारी को फोन किया था और कहा था कि सागरमल चौक स्थित ससुराल से बीते 20 मई की रात नीमा ने पड़ोसी के मोबाइल से फोन कर कहा कि सभी लोग उसे बेरहमी से मारपीट रहे हैं।

 

 

छत से भी गिराने का प्रयास किया गया।अरुण कुमार सिंह का कहना है कि शुक्रवार की सुबह 7:00 बजे से पहले नीमा स्वयं नगर थाना गयी थी।वहां बताया गया कि तुम्हारे सास ससुर ने तुम्हारे विरुद्ध आवेदन दिया है।तुम भी आवेदन दे दो।नीमा ने मरने से पहले पुलिस को आवेदन भी दिया था।अगर नगर थाना का एक सिपाही भी उसके ससुराल जाता तो नीमा बच सकती थी। शोकाकुल अरुण कुमार सिंह कहते हैं कि पुलिस द्वारा अब नीमा के आवेदन को लापता कर दिया गया है।सत्यापन के लिए नगर थाना में लगे सीसीटीवी की जांच की जाय। अधिवक्ता का यह भी कहना है कि नीमा ने पड़ोसी के मोबाइल के माध्यम से अपने भाई को 20.05.2021 की रात 11.14बजे सारी घटना से अवगत कराया था।नीमा से कई बार हुई बात चीत का कॉल रिकार्ड भी है।अब जबकि नीमा मर चुकी है तो कुछ पुलिस अधिकारी हत्यारों को मदद पहुंचाने में लगे हुए हैं।व्यथित पिता का कहना है कि नगर थाना के दारोगा राजकुमार सिंह और पुलिस लाइन के एक दारोगा की संदिग्घ भूमिका भी सामने आ रही है।कुछ दिन पहले जब नगर थाना के दारोगा राजकुमार सिंह का स्थानांतरण हुआ था,तो फ़िर उनका तबादला किसने रुकवाया,यह जांच का विषय है।जांच का विषय यह भी है कि पुलिस लाइन के किस दरोगा का हत्यारों के परिवार से जुड़ाव है।क्या नीमा के देवर का उस दरोगा से संबंध है। अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह सिसकते हुए कहते हैं कि बड़ी बात यह है कि पांच दिन पहले नीमा को जबरदस्ती मायके से लाया गया था और कई दिनों से मारपीट की जा रही थी।पुलिस को इस बात की सूचना दी गयी थी।लेकिन पुलिस ने एक असहाय का संज्ञान लेना इसलिए मुनासिब नहीं समझा, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे और वह नगर थाना पुलिस को रुपये देने में असमर्थ थी।इकलौती अबोध बेटी की हत्या साजिश के तहत हो सकती है।इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच करते हुए जिम्मेवार पुलिस अधिकारी के विरुद्ध सख्त करवाई कार्रवाई होनी चाहिए।इधर आरोपी दारोगा राजकुमार सिंह का कहना है कि वह अखिलेश सिंह को जानते तक नहीं,जबकि अखिलेश सिंह का कहना है कि पता नहीं क्यों,उनका नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है। दूसरी तरफ खगड़िया के पूर्व नगर सभापति सह जाप नेता मनोहर कुमार यादव ने इस घटना पर दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि नीमा के पिता एवं भाई द्वारा बताया गया कि हत्या के एक दिन पहले भी परिवार वालों के द्वारा मारपीट की गई थी।इस बात की जानकारी नीमा ने एक पड़ोसी के मोबाइल से अपने पिता को दी थी।जानकारी मिलने के बाद नीमा के पिता द्वारा नगर थाना को मोबाईल से सूचना दी गई और बताया गया कि उनकी बेटी के साथ उसके परिवार वाले मारपीट कर रहे हैं।इस मामले को दिखवाया जाय। लेकिन नगर थाना की पुलिस द्वारा एक्शन नहीं लिया गया।

दूसरे दिन सुबह पांच-छह बजे के लगभग नीमा स्वयं नगर थाना जाकर अपने ऊपर हो रहे प्रताड़ना और मारपीट की लिखित शिकायत की।बावजूद इसके पुलिस द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया गया और उसी दिन नीमा के ससुराल वालों द्वारा दोपहर में उसकी हत्या कर दी गई। श्री यादव के मुताबिक इससे स्पष्ट होता है कि नगर थाना पुलिस की लापवाही के कारण ही नीमा अब इस दुनिया में नहीं रही।पूर्व नगर सभापति के अनुसार इस घटना की लीपापोती और हत्यारों को बचाने में नगर थाना के दारोगा राजकुमार सिंह लगे हुए हैं।राजकुमार सिंह और पुलिस लाइन के दारोगा अखिलेश सिंह द्वारा हत्यारों को बचाने का प्रयास किया जाना समाज के लिए घातक है। पूर्व नगर सभापति ने सवालिया लहजे में कहा है कि थोड़ी देर के लिए अगर मान भी लिया जाय कि नीमा द्वारा आत्महत्या की गई है,फिर भी पुलिस दोषी है।क्योंकि नीमा के पिता द्वारा पुलिस से एक दिन पहले भी मोबाइल पर अपनी पुत्री के साथ मारपीट की शिकायत की गई थी।उसके बाद घटना के दिन भी सुबह में नीमा स्वयं परिवार वालों के खिलाफ लिखित शिकायत की थी।अगर उसी समय पुलिस करवाई करती तो यह घटना नहीं होती।अगर आत्महत्या भी की है तो मजबूर होकर की होगी। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि घटना की जांच वरीय अधिकारियों के द्वारा कराई जाय।इतना ही नहीं, नीमा के शव का पोस्टमार्टम मेडिकल टीम गठित कर कराया जाय। नगर थाना के दारोगा को अविलंब बर्खास्त करते हुए हत्यारा को अविलंब गिरफ्तार किया जाय,ताकि पीड़ित पिता की बेटी के हत्यारों और इस घटना में संल्पित दारोगा को सजा मिल सके। भविष्य में कोई भी इस तरह की घटना को अंजाम न दे सके,इसके लिए भी पुलिस के वरीय पदाधिकारियों को गंभीर पहल करनी चाहिए।बहरहाल,देखना दिलचस्प होगा कि इस गंभीर मामले की गंभीर पड़ताल होती है अथवा कुछ अन्य जटिल मामलों की तरह यह मामला भी फाइलों में ही दम तोड़ जाता है!