खगड़िया
गरीबों के रहनुमा कहलाने वाले पूर्व नगर सभापति मनोहर यादव ने एक बार फिर पेश की मानवता की मिसाल,कचड़ों के बीच जिंदगी तलाशते रहे महादलित समुदाय के दो लोगों की मौत पर मनाया मातम,दाह सं
खगड़िया(गौरव सिन्हा)। स्वार्थ के इस युग में लोग जहां अपनों की मदद तो क्या, कुशल क्षेम जानने से भी परहेज करते हैं, वहीं समाज में कुछ ऐसे भी शख्सियत हैं,जो दीन-दुखियों की मदद के लिए दोनों हाथों की मुठ्ठियां खोले रहते हैं।ऐसे ही शख्सियतों में एक नाम शुमार है,खगड़िया जिले के मनोहर कुमार यादव का।समाज की सेवा करते-करते नगर परिषद के अध्यक्ष बने मनोहर कुमार यादव आज


स्वार्थ के इस युग में लोग जहां अपनों की मदद तो क्या, कुशल क्षेम जानने से भी परहेज करते हैं, वहीं समाज में कुछ ऐसे भी शख्सियत हैं,जो दीन-दुखियों की मदद के लिए दोनों हाथों की मुठ्ठियां खोले रहते हैं।ऐसे ही शख्सियतों में एक नाम शुमार है,खगड़िया जिले के मनोहर कुमार यादव का।समाज की सेवा करते-करते नगर परिषद के अध्यक्ष बने मनोहर कुमार यादव आज की तिथि में राजद के कद्दावर नेता हैं और उनकी धर्मपत्नी श्रीमति सीता कुमारी नगर परिषद की कुर्सी संभाल रहीं हैं। दरअसल,आज रविवार अर्थात 26 दिसम्बर को खगड़िया जिला मुख्यालय स्थित कृष्णापुरी,बलुआही स्थित राजद कार्यालय का नजारा बदला-बदला सा था।लोगों की आंखें नम थी और सभी के जुबां खामोश थे।लेकिन खगड़िया के पूर्व नगर सभापति सह राजद नेता मनोहर कुमार यादव द्वारा गरीबों की मदद की जा रही थी।वार्ड नं०-26 बलुआही बस स्टैंड निवासी स्वर्गीय जागो सदा के दाह संस्कार के लिए उनके पुत्र चीना सदा एवं स्वर्गीय हजारी मल्लिक की बेवा मंती देवी की पुत्री द्रौपदी देवी को पांच-पांच रुपये की मदद की जा रही थी।
गरीब परिवारों को मदद किए जाने के पश्चात पूर्व नगर सभापति सह राजद नेता मनोहर कुमार यादव ने बताया कि,दोनों परिवार महादलित समुदाय से हैं।चीना सदा का कोई अपना सगा नहीं है।यह कचड़ों के बीच से पन्नी सहित अन्य बेकार चीजों को चुन-चुनकर कर अपना पेट भरते रहे थे।अधिक उम्र होने की वजह से बीती रात उनकी मौत हो गई।श्री यादव ने कहा कि, सदा समुदाय के दर्जनों लोग उनके पास आये और कहा दुनियां में इनका कोई नहीं है।इनके अपने के लिए दाह संस्कार को ले चंदा करना पड़ेगा।उन्होंने अविलंब पांच हजार रुपये दाह संस्कार के लिए दिया।
पूर्व नगर सभापति श्री यादव ने मंती देवी के विषय में कहा कि,उनके पति हजारी मल्लिक की मौत अधिक उम्र हो जाने की वजह से शनिवार को हो गई।मंती देवी अपनी बेटी द्रोपदी देवी पति- नारायण मलिक के यहां रह रही हैं।मंती देवी की पुत्री द्रोपदी देवी आयी और बोली कि मैं बहुत गरीब महादलित हूं,मेरे पास दाह संस्कार के लिए पैसे नहीं हैं। कैसे अपनी माँ का दाह संस्कार करुंगी,तो उन्होंने उनकी माँ के दाह संस्कार के लिए पाँच हजार रुपये दे दिया।श्री यादव ने कहते-कहते यह भी कह दिया कि,मानव सेवा से बढ़कर इस दुनिया में कोई सेवा नहीं है सभी मानवता का ख्याल रखना चाहिए ।
मौके पर नगर पार्षद रणवीर कुमार,समाजसेवी अजय भारती,सर्वजीत पांडे,अजीत तिवारी आदि मौजूद थे।
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