खगड़िया।

 

खगड़िया सदर प्रखण्ड अंतर्गत रानी सकरपुरा पंचायत के मानस प्रचार समिति सदस्यों ने धूम धाम से गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनायी।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक महादेव पाठक ने कहा कि तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे।रामचरित मानस जैसे महाकाव्य की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने ही की थी।तुलसीदास की इस रचना ने उन्हें अमर कर दिया।

उन्होंने कहा कि रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का काव्य रुप में वर्णन किया है।तुलसीदास जी ने अपने जीवनकाल में कई रचनाएं लिखी है।उनके दोहे जन-जन की जुबां पर आज भी हैं।उनके दोहों ने व्यक्ति एवं समाज को अच्छा संदेश देने का काम किया है।

उन्होंने एक दोहे का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'तुलसी साथी विपत्ति के विद्या विनय विवेक।साहस सुकृति सुसत्यव्रत राम भरोसे एक।।' अर्थात गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं, विपत्ति के समय में आपको घबराकर हार नहीं माननी चाहिए।ऐसी स्थिति में आपको अपने अच्छे कर्म,सही विवेक और बुद्धि से काम लेना चाहिए।मुश्किल समय में साहस और अच्छे कर्म ही आपका साथ देते हैं।

श्री तुलसीदास जी की जीवनी पर विशेष प्रकाश डालते हुए अधिवक्ता रणजीत कुमार महतो ने कहा कि तुलसी बाबा की अद्भुत पोथी रामचरितमानस इतनी लोकप्रिय है कि मूर्ख से लेकर महापण्डित तक के हाथों में आदर से स्थान पाती है।उस समय की सारी शंकाओं का रामचरितमानस में उत्तर है।अकेले इस ग्रन्थ को लेकर यदि गोस्वामी तुलसीदास चाहते तो अपना अत्यन्त विशाल और शक्तिशाली सम्प्रदाय चला सकते थे।यह एक सौभाग्य की बात है कि आज यही एक ग्रन्थ है,जो साम्प्रदायिकता की सीमाओं को लांघकर सारे देश में व्यापक और सभी मत-मतान्तरों को पूर्णतया मान्य है।सबको एक सूत्र में ग्रंथित करने का जो काम पहले शंकराचार्य स्वामी ने किया, वही अपने युग में और उसके पीछे आज भी गोस्वामी तुलसीदास ने किया।उन्होंने कहा कि वैसे तो भगवान श्रीराम के जीवन का वर्णन अनेक ग्रंथों में मिलता है, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई श्रीरामचरितमानस उन सभी ग्रंथों में अतुलनीय है।भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन जिस प्रकार श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने किया है,वैसा वर्णन किसी अन्य ग्रंथ में नहीं मिलता।यही कारण है कि श्रीरामचरितमानस को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र ग्रंथ माना जाता है।गोस्वामी तुलसीदास को भी हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

कार्यक्रम में घूरन दास ने भगवान के विभिन्न तरह के भजनों को गाकर माहौल को भक्तिमय बनाने का कार्य किया।सीताराम पोद्दार,मथुरा निषाद,रामविनय महतों,हरे कृष्णा लाल महतो,अर्जुन महतों,बोढ़न प्रसाद महतो, दामोदर साहनी,मिंटू कुमार महतो इत्यादि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

प्रवीण कुमार प्रियांशु की रिपोर्ट