एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया

खगड़िया नगर परिषद में कार्यरत कनीय अभियंता रौशन कुमार की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।प्राप्त दस्तावेजों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के आधार पर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर संदेह जताया गया है।मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है,जिसने नगर सभापति के पत्र पर रोक (Stay) लगाते हुए किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर स्थगन आदेश जारी किया है।

हाईकोर्ट की स्पष्ट रोक के बावजूद नगर परिषद की बैठक, कानून से ऊपर नगर परिषद?

हैरानी की बात यह है कि कोर्ट की रोक के बावजूद नगर परिषद द्वारा स्टैंडिंग कमिटी की बैठक आयोजित की गई और उस पर निर्णय भी लिए गए।यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या नगर परिषद स्वयं को न्यायपालिका से ऊपर समझती है?यह स्थिति सीधे तौर पर अदालत की अवमानना जैसी प्रतीत होती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर जब कार्यपालक पदाधिकारी रवि कुमार से प्रतिक्रिया मांगी गई,तो उन्होंने कोर्ट के आदेश की बात स्वीकार की,लेकिन यह नहीं बताया कि प्रतिबंध के बावजूद मीटिंग की अनुमति कैसे दी गई।उनका यह रवैया पारदर्शिता और जवाबदेही की पूरी तरह से अनदेखी करता है।

नगर सभापति द्वारा RTI से प्राप्त दस्तावेजों में रौशन कुमार की डिग्री और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है।हालांकि नगर परिषद के अधिकारी इन दस्तावेजों को “अप्रमाणिक”बताकर मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं,लेकिन इस पर कोई आधिकारिक खंडन या जांच आदेश अब तक सामने नहीं आया है।

नगर सभापति के पति ज्योतिष मिश्रा ने RTI दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं।इसके बाद से ही जनता में रोष है और रौशन कुमार की नियुक्ति को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

प्रमुख प्रश्न जो नगर परिषद को घेरते हैं:

कोर्ट की रोक के बावजूद बैठक की अनुमति किस आधार पर दी गई?

RTI में उठे सवालों की जांच करने के बजाय उन्हें “अप्रमाणिक”कहकर क्यों खारिज किया जा रहा है?

क्या नगर परिषद में जवाबदेही और पारदर्शिता सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?

कार्यपालक पदाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी अब तक चुप क्यों हैं?