राजेश सिन्हा   

                                              

   

 नीतीश सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का दावा लगातार किया जा रहा,प्रत्येक माह लाखों-करोड़ों रुपये खर्च भी किए जा रहे हैं,लेकिन खगड़िया जिले की शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे रसातल में चली जा रही है।स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले के टीचरों द्वारा पढ़ाई कम राजनीति अधिक की जा रही है।सबसे खतरनाक स्थिति डीईओ के चहेते हेडमास्टरों ने पैदा कर दी है।दिनभर खगड़िया के अनुमंडल कार्यालय में अंगदी पांव जमाकर ऐसे हेडमास्टर महज राजनीति करने में व्यस्त रहते हैं।पैरवी-पैगाम का दौर चलता रहता है और हेडमास्टर जेबें गरम करते रहते हैं।स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगा सकते हैं कि,अधिकांश स्कूलों के प्रधानाध्यापक पठन-पाठन से अधिक राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं और टोकने पर स्पष्ट कहते हैं,कि जहां जाना हो जाइए,डीएम हों या डीईओ मुझसे ड्यूटी नहीं करा सकते।प्रत्येक माह ड्यूटी नहीं करने के एवज में ऐसे ही विभागीय पदाधिकारियों को नजराना नहीं देते हैं।अन्य स्कूलों की बातों को कुछ देर के लिए नजर अंदाज कर अगर खगड़िया सदर प्रखंड अंतर्गत रानीसकरपुरा पंचायत के प्राइमरी स्कूल लबडोबहा की करें,तो विद्यालय का हाल बेहाल है।इस विद्यालय को न ही अपना भवन है और न ही बच्चों के लिए कोई सुख सुविधा।इससे बुरी बात और क्या हो सकती है कि,इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक दीपक कुमार स्कूल से न केवल अक्सर गायब रहते हैं,बल्कि माड़र दक्षिणी पंचायत स्थित घर पर रहकर ग्रामीण राजनीति में मस्त भी रहते हैं।नतीजतन पठन-पाठन बुरी तरह चौपट हो गया है और ग्रामीणों के बीच आक्रोश पनपता जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि पोषण क्षेत्र के अधिकांश बच्चे दलित व महादलित हैं।बावजूद इसके, प्रधानाध्यापक द्वारा विभिन्न योजनाओं की राशि का गबन कर लिया जाता है।

बच्चों के लिए सरकार द्वारा प्रदत्त अनाजों की बंदरबांट की जाती है।स्थानीय पूर्व मुखिया कहते हैं कि,ऐसी बात नहीं है कि प्रधानाध्यापक के करतूतों की जानकारी डीईओ अथवा डीएम तक नहीं पहुंचायी गई है!ग्रामीणों का नेतृत्व करते हुए भाकपा अंचल कमिटी की ओर से डीईओ और डीएम को आवेदन दिया गया था।विभागीय स्तर से कार्रवाई का भरोसा भी मिला,लेकिन नतीजा ढ़ाक के तीन पात रहा।जानकारों की बातों पर यकीन करें तो डीईओ ने लक्ष्मीनारायण के दम पर मामले को फाईलों तक ही सीमित रखा है।उन्होंने कहा कि सब विभागीय भ्रष्टाचार का कमाल है।

इधर प्रधानाध्यापक भी कहते फिर रहे हैं कि जिसको जो करना है करें,मैं अपनी मनमर्जी से ही चलूंगा।,मामला जब सुर्खियों में है तो फिर विभागीय स्तर से पूरे मामले की जांच करते हुए एचएम के विरुद्ध ठोस कार्रवाई होती है,अथवा अन्य मामलों की तरह इस मामले को भी जमींदोज कर दिया जाता है,इस पर सबकी नजर है!!

https://youtu.be/Z9iPIFN38Vc