खगड़िया(राजकमल)।

शिक्षा व्यवस्था का हाल देखना हो,तो एक बार बेलदौर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों का मुआयना कर लीजिए।किसी विद्यालय में शिक्षक हैं,तो पढ़ाई नहीं होती और कहीं शिक्षार्थी हैं,तो मास्टरों का अभाव है।अन्य विद्यालय की समस्याओं को दरकिनार कर अगर बेलदौर प्रखंड अंतर्गत दिघौन स्थित अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय की करें,तो यह प्रखंड का ऐसा अनोखा विद्यालय है,जिसकी उपरी मंजिल पर मुखिया पति का कार्यालय चलता है।हालांकि मुखिया पति ही इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक भी हैं।दिघौन गांव निवासी मोहम्मद सज्जाद अली ने इस विद्यालय की पूरी स्थिति को रेखांकित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर जिला पदाधिकारी तक को आवेदन देकर मामले से अवगत कराया है।लेकिन डीईओ और डीएम की नजरें भी इस ओर इनायत नहीं हो रही है।जबकि अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय के एचएम विमल कुमार राज शिक्षण कार्यों में रुचि न लेकर मुखिया पति होने के नाते न केवल विद्यालय से बराबर अनुपस्थित रहकर नेतागिरी करते हैं,बल्कि विद्यालय की उपरी मंजिल पर अपना अघोषित कार्यालय बनाते हुए पंचायत का विभिन्न कार्य भी निपटाते हैं।नतीजतन विद्यालय में पठन-पाठन चौपट होकर रह गया है।बताया जा रहा है कि,दिघौन पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया रुबीया देवी खगड़िया जिला मुख्यालय में रहती हैं।लेकिन उनका नाम का काम स्कूल के एचएम निपटाते हैं।एचएम द्वारा स्कूल की उपरी मंजिल पर सहयोगियों के साथ बैठकर पंचायत का काम निपटाए जाने की चर्चा चहुंओर हो रही है,लेकिन इन तमाम बातों से बेखबर मुखिया पति एचएम किसी की कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं।

स्थानीय लोगों का तो यह भी आरोप है कि,एचएम विद्यालय की उपरी मंजिल पर बैठकर शराब भी पीते हैं। विद्यालय खुलने के बावजूद विमल कुमार राज अपने विद्यालय में न रहकर महज योजनाओं के नाम पर पीसी लेने में व्यस्त रहते हैं।नतीजतन पंचायत के वार्ड सदस्य सहित बुद्धिजीवियों के बीच आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि,इस विद्यालय के एचएम विमल कुमार राज की पत्नी जबसे मुखिया बनी हैं,तब से विद्यालय की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। विद्यालय में पढ़ाई नाम मात्र होती है।

दिघौन गांव निवासी मोहम्मद सज्जाद अली का कहना है कि,उनके द्वारा बीते 20सितम्बर को ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन दिया गया है।लेकिन अभी तक फलाफल शून्य है।बहरहाल,देखना दिलचस्प होगा कि,ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी डीईओ और डीएम की तंद्रा भंग होती है अथवा भगवान भरोसे ही विद्यालय संचालित होता रहता है।