राजेश सिन्हा

खगड़िया जिले के मानसी थाना अंतर्गत मां कात्यायनी स्थान में सोमवार को हिंसक हो चुके कुछ लोगों से चौथम सीओ भरत भूषण को स्थानीय लोगों ने अगर नहीं बचाया होता,तो शायद किसी बड़ी घटना की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता था।आश्चर्य का विषय तो यह है कि,उस शिलान्यास समारोह में एमपी चौधरी महबूब अली कैसर और बेलदौर विधायक पन्नालाल पटेल भी बॉडीगार्ड के साथ मौजूद थे,लेकिन महज तमाशबीन बने रहे।इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद यह तो प्रमाणित हो गया है कि,साजिश के तहत ही भरत भूषण को शिलान्यास समारोह में बुलाया गया और समारोह खत्म होते ही उन पर हमला कर दिया गया।हालांकि घटना के बाद बातचीत करते सीओ भरत भूषण ने भी स्वीकार किया कि,उन्हें लगता है साजिश के तहत उनके साथ घटना को अंजाम दिया गया।अगर स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें नहीं बचाया जाता, तो बड़ी घटना घट सकती थी। सीओ ने यह भी कहा कि,ऐसे माहौल में कार्य करना मुश्किल है।सीओ के मुताबिक स्थानीय विधायक पन्नालाल सिंह पटेल द्वारा उन्हें कात्यायनी स्थान बुलाया गया था।शिलान्यास के बाद कात्यायनी न्यास समिति सदस्य सह पूर्व जिप सदस्य अरुण यादव के रिश्तेदार प्रह्लाद यादव,न्यास समिति के सदस्य संजय साहू समेत कुछ लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है।

उन्होंने कहा कि घटना के समय एसपी व एसडीपीओ को फोन किया गया,लेकिन रिसीव नहीं किया जा सका।

 

 

इस बीच उन्होंने मानसी थानाध्यक्ष को भी फोन किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की जानकारी नहीं है।सीओ के मुताबिक,इस मामले में उनके द्वारा आवेदन दिया जा रहा है।बात अलग है कि, मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम डॉक्टर आलोक रंजन घोष पूरे मामले की अपने स्तर से जांच कर रहे हैं।लेकिन यह सवाल अपनी जगह मुंह बाए खड़ा है कि, सीओ भरत भूषण को किस बात की सजा दी गई और हिंसक हो चुके लोगों को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार आखिर किसने दिया!

दरअसल,कात्यायनी मंदिर परिसर में 17लाख की लागत से बनने वाले आरओ प्लांट का सांसद चौधरी महबूब अली कैसर तथा विधायक पन्नालाल सिंह पटेल द्वारा संयुक्त रुप से शिलान्यास किया गया।अफरातफरी उस वक्त मच  गई,जब शिलान्यास समारोह समाप्त होते ही स्थानीय लोगों में से कुछ लोग सीओ भरत भूषण के विरुद्ध नारेबाजी करने लगे।इतना ही नहीं,सीओ जब उग्र लोगों से वार्ता करने के लिए आगे बढ़े, तो नारेबाजी कर रहे लोगों ने उनके साथ हाथापाई शुरु कर दी।इसी बीच किसी ने उनका शर्ट भी फाड़ दिया।स्थानीय लोगों की मदद से किसी तरह उन्मादियों से उन्हें बचाया गया।आश्चर्य का विषय तो यह है कि,सांसद तथा विधायक अपने-अपने बाडीगार्ड के साथ मूकदर्शक बने खड़े रहे।क्या यह माना जाय कि,बीते एक अक्टूबर को कात्यायनी मंदिर में रखे दान पेटी से जबरन राशि निकालने संबंधित मामले की सीओ द्वारा की जांच से आक्रोशित होकर लोगों ने सीओ को हमले का शिकार बनाया!ऐसा संभव भी इसलिए है,क्योंकि जांच रिपोर्ट में सीओ ने न्यास समिति के कुछेक सदस्यों पर दान पेटी से राशि निकालने का आरोप लगाया था।स्थानीय लोग भी मानते हैं कि,उसी जांच रिपोर्ट के परिणामस्वरुप सीओ पर हमला किया गया।बहरहाल,मामले की तह में क्या है,यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा!लेकिन बॉडीगार्ड के साथ उक्त स्थल पर मौजूद एमपी और एमएलए का तमाशबीन बना रहना,किसी रहस्य से कम नहीं है।