एस.के.वर्मा

   

खगड़िया।आज पत्रकारिता क्षेत्र में भी अतिक्रमण हो रहा है।अधकचरे ज्ञान रखने वाले और कम पढ़े-लिखे नौजवानों का भी पत्रकारिता में प्रवेश हो गया है,जिनका मुख्य पेशा हो गया है भयादोहन करना,धौंस जमा कर लोगों से उगाही करना।इससे पीत पत्रकारिता को बढ़ावा मिलता है।उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार सह समाजसेवी डॉक्टर अरविन्द वर्मा ने'पीत पत्रकारिता का समाज पर दूषित प्रभाव' विषयक परिचर्चा की अध्यक्षता करते हुए कही।अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ वर्मा ने कहा कि,ऐसे पीत पत्रकार हमेशा प्रशासन के टारगेट में रहते हैं।उनकी मानसिकता ही नकारात्मक होती है।डॉ वर्मा ने कहा कि, आज भी लोगों को चौथे स्तंभ पर पूरा भरोसा है।इसलिए पीत पत्रकारिता जैसे वायरस से समाज पर दूषित प्रभाव नहीं पड़े,इसका ख्याल रखना बेहद जरुरी है।डॉ वर्मा ने आज के नौजवान पत्रकारों से अपील करते हुए कहा कि, क्षणिक सुख के लिए आम जनता से विश्वासघात नहीं करें और पीत पत्रकारिता से कोसों दूर रहें।फरकिया क्षेत्र के चर्चित समाज सेवी चंद्रशेखर मंडल ने वरिष्ठ पत्रकार सह समाज सेवी डॉ अरविन्द वर्मा को पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और कहा कि,डॉ वर्मा ने चौथे स्तंभ की गरिमा को अब तक बनाए रखा।डॉ वर्मा समाज के हितकारी समाचारों को निर्भय होकर हमेशा प्रकाशित करते रहे।पीत पत्रकारिता से कोसों दूर रहे हैं।इनकी सोच सदैव सकारात्मक रही है।समाज सेवी चंद्रशेखर मंडल ने कहा कि,वह सही और सच्चे पत्रकारों के साथ हैं और साथ रहेंगे।

महिला पत्रकार एवं प्रभा महिला विकास समिति की सचिव इन्दु प्रभा ने अपने अखबार के स्थापना काल से अब तक के सफरनामे से लोगों को अवगत कराया।उन्होंने खट्टे-मीठे अनुभवों को भी शेयर किया और कहा कि, पहला अखबार कंपोजिंग कराकर ट्रेडिल प्रिंटिंग मशीन पर छपवाकर प्रकाशित किया गया था।आज युग बदल गया, इसलिए हमें भी बदलना पड़ा।अब हमलोग डिजिटल युग में जी रहे हैं।उन्होंने पत्रकारों से अपील करते हुए कहा कि, टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में नहीं पड़ें।सच को निडर हो लिखें।इतना ही नहीं,जनता के समक्ष प्रमाणित तथ्य ही उजागर करते रहें।परिचर्चा का आयोजन एक अखबार के स्थापना दिवस पर किया गया था।परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार वर्मा,सुरेश नायक,अजय वर्मा,साहिल आनन्द,गौरव वर्मा,एडवोकेट प्रियवर्त सिंह,आर आर वर्मा तथा सुरेश कुमार आदि ने भी भाग लिया।