प्रवीण कुमार प्रियांशु अलौली(खगड़िया)।अलौली प्रखंड अंतर्गत शुम्भा पंचायत निवासी अरविन्द पासवान व उनके परिजन पुलिस के भय से भयाक्रांत हैं,लेकिन उन्हें बहादुपुर पिकेट प्रभारी द्वारा उन्हें इस बात का जवाब नहीं दिया जा रहा है कि किस जुर्म में पुलिस अरविन्द को खोज रही है।बिना किसी नोटिस के पुलिस पिछले दो दिनों से उनके घर पर दस्तक देते हुए पुलिस द्वारा उन्हें खोजा जाना परिजनों सहित गांव के लोगों को नागवार लग रहा है।लोग यह सवाल कर रहे हैं कि अरविन्द पासवान को आखिर क्यों खोज रही है पुलिस!स्थानीय लोगों का कहना है कि बहादुरपुर पिकेट प्रभारी अपने दल-बल के साथ अरविन्द पासवान को दो दिनों से गिरफ्तार करने आते हैं!लेकिन अरविन्द के परिजनों सहित स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जब पूछा जाता है कि अरविंद पासवान की तलाश क्यों की जा रही है,तो बहादुरपुर पिकेट प्रभारी द्वारा कोई जबाव नहीं दिया जाता है।इधर जानकारों का कहना है कि डीजीपी के आदेशानुसार गिरफ्तार करने से पहले लोगों को बता देगी बिहार पुलिस कि उन्हें कि जुर्म में गिरफ्तार किया जाना है।बिहार के डीजीपी संजीव कुमार सिंघल द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि साधारण जुर्म या सात साल से कम सजा वाले मामलों में पुलिस अब सीधे किसी की गिरफ्तारी नहीं करेगी।सात साल से कम सजा वाले मामले में गिरफ्तारी करने या नहीं करने की परिस्थितियों के बीच कुछ प्रावधानों का पालन करना होगा। पुलिस अब सात साल से कम सजा वाले केस में सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय पहले नोटिस दे सकती है।इसके बाद आरोपी जमानत लेने की कारवाई करेगा।जबकि बीते दो दिनों से अरविंद पासवान के घर बहादुरपुर पिकेट प्रभारी अपने दल-बल के साथ दो बार गिरफ्तार करने के नियत से आ चुके हैं।अरविंद पासवान के परिजन जब थाना पर इस बात की जानकारी के लिए गए,तो ओपी प्रभारी अशोक कुमार सिंह द्वारा कोई भी माकूल जवाब नहीं दिया गया। अरविन्द के परिजनों का कहना है कि उनलोगों को ओपी प्रभारी द्वारा इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि अरविन्द की तलाश क्यों की जा रही है!यहां तक कि मुकदमे का कोई साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका।इससे साफ जाहिर होता है कि बहादुरपुर पिकेट प्रभारी अपनी मनमानी के कारण अरविन्द पासवान को बेवजह परेशान कर रहे हैं।इधर एसडीएफ लाइव इंडिया के इस संवाददाता द्वारा बार-बार प्रयास किए जाने के बाद भी बहादुरपुर पिकेट प्रभारी से मुलाकात संभव नहीं हो सकी।नतीजतन उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।