संवाददाता

 

पटना।नीतीश कुमार अतिपिछड़े समाज के लोगों के लिए विकास विरोधी हैं। नगर निकाय चुनाव के नाम पर लिया गया असंवैधानिक निर्णय इस बात का प्रमाण है।नीतीश कुमार की फितरत में धोखेबाजी है और अब वह प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब और लालू यादव के दबाव में अतिपिछड़े वर्ग के भोलेभाले लोगों को धोखा दे रहे हैं।उक्त बातें,भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने आज 13 अक्टूबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कही।उन्होंने कहा कि,कर्पूरी ठाकुर जी के अतिपिछड़ों के विकास पर केंद्रित सामाजिक नीति और मण्डल कमीशन लागू होने के सामाजिक-राजनीतिक विरासत पर पहला अधिकार अगर किसी का है,तो हमारा है।1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में या कर्पूरी ठाकुर के साथ सरकार में रहकर या 1980 के बाद सरकार से बाहर रहकर हमने लगातार गरीब, कमजोर और पिछड़े समाज के हकों को लेकर उनका साथ दिया है।वर्ष 1989 में देश में मण्डल आयोग की सिफारिशों को लागू करने सहित बिहार में 2006 के बाद से आरक्षण के जो प्राविधान हैं, उनके पक्ष में सहमति बनाने और लागू कराने में हमारी भूमिका निर्विवाद है।

उन्होंने कहा कि,बिहार के उच्च न्यायालय ने नीतीश कुमार के वास्तविक चरित्र को सभी के सामने नंगा कर दिया है।सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगर निकाय के चुनावों में नियमावलियों का प्रावधान किया है।कोई भी राज्य उन नियमों की अवहेलना नहीं कर सकता है।उच्च अदालत का फैसला सुप्रीम कोर्ट के प्रावधानों के आलोक में ही आया है।लेकिन वह इसके लिए भाजपा को जिम्मेवार बता रहे हैं! यह दृष्टता नहीं तो और क्या है!हम कोर्ट से मांग करेंगे कि,इस पूरे मसले पर स्वतः संज्ञान ले और नीतीश सरकार को अवमानना के लिए दोषी करार करे।

उन्होंने यह भी कहा कि, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता नीतीश कुमार की इस चालाकी की पोल खोलेंगे और इसके लिए बिहार के सभी जिलों में हमारे कार्यकर्ता 17 अक्टूबर को प्रखण्ड मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।घर-घर जाकर नीतीश कुमार द्वारा अति पिछड़े वर्गों को दिए गए इस धोखे की राजनीति और संविधान की अवहेलना का पर्दाफाश करेंगे।

दूसरी तरफ,बिहार के पूर्व मंत्री और विधानपरिषद के नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने भी संवाददाता सम्मेलन में कहा कि,मुख्यमंत्री अति पिछड़ों के नायक नहीं,खलनायक बन गए हैं।उन्होंने कहा कि, नीतीश कुमार द्वारा अति पिछड़ों का सम्मान गिराने का काम किया गया है।श्री चौधरी ने कहा कि,सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद भी आयोग का गठन नहीं करना, उनकी मंशा को दिखाता है।उन्होंने कहा कि, सर्वोच्च न्यायालय के फैसला के बाद महाराष्ट्र में आयोग बनाकर नगर निकाय चुनाव कराया गया।इसी तरह मध्य प्रदेश में भी चुनाव हुए।उन्होंने कहा कि अदालत का आदेश सभी राज्यों को भेजा गया।ऐसे में यह भी कोई राज्य नही कह सकता कि,उन्हें आदेश की जानकारी नहीं है।श्री चौधरी के मुताबिक आरक्षण देते हुए जल्द ही नगर निकाय चुनाव कराया जाना चाहिए।

प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्दार्थ शंभू,प्रदेश प्रवक्ता संतोष पाठक, मीडिया प्रभारी राजेश कुमार झा और अशोक भट्ट  भी मौके पर उपस्थिति रही।